संवाददाता अरविंद कोठारी
मुंबई महानगरपालि में भ्रष्टाचार की खबरें लगातार सुर्खियों में हैं। भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच सत्ता लाभ के लिए टेंडर और ठेकों को लेकर विवाद खुलकर सामने आया है। प्रशासक शासन के दौरान मुंबईकरों के पैसों के दुरुपयोग को कांग्रेस लगातार सबूतों के साथ उजागर करती रही है। अब 1000 करोड़ रुपये की टेंडर रद्द होने के बाद कांग्रेस के आरोपों को और बल मिला है।
मुंबई कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेशचंद्र राजहंस ने कहा कि केवल टेंडर रद्द करने से मामला नहीं सुलझेगा। इस भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों और सत्ताधारी दलों के नेताओं की जांच कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि मुंबई कांग्रेस ने महानगरपालिका में भ्रष्टाचार पर कई पत्रकार सम्मेलनों के माध्यम से सब कुछ उजागर किया है। भाजपा और शिंदे शिवसेना केवल सत्ता के लिए एकजुट हैं; उन्हें मुंबईकरों के हित, स्वास्थ्य, शिक्षा, पीने के पानी और बेस्ट जैसी सुविधाओं में कोई रुचि नहीं है। उनका काम केवल ठेकेदारों के खाते भरना और टक्केवारी से अपनी संपत्ति बढ़ाना रहा है।
तीन वर्षों से अधिक समय तक प्रशासक शासन में महापालिका की तिजोरी पर नियंत्रण किया गया। केवल एकनाथ शिंदे पर राजनीतिक विवाद कर 1000 करोड़ रुपये के ठेकों को रद्द किया गया। कांग्रेस ने कहा कि मुंबईकरों के पैसों का हिसाब भाजपा और शिवसेना महायुति को देना होगा।
भाजपा आज पारदर्शिता की बात कर रही है, लेकिन मुंबई की तिजोरी लूटने में भाजपा भी पीछे नहीं है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहले ही कह चुके हैं कि बीएमसी के बैंक में रखी जमा राशि पर नजर रखी जा रही है। इसके तहत 90 हजार करोड़ रुपये की जमा राशि का दुरुपयोग करके खिसे भरे जाने का मामला सामने आया। यह पैसा मुंबईकरों की मेहनत का है, भाजपा-शिवसेना का नहीं।
मुंबई में केवल ठेकों में भ्रष्टाचार नहीं हुआ, बल्कि शहर की प्रमुख जमीन भी मोदानी को किसने दी? नियम, शर्तें और अटी किन्हीं ने नजरअंदाज कर लाभ पहुंचाया।
सुरेशचंद्र राजहंस ने भाजपा को चुनौती दी कि यदि वे सच में ‘भ्रष्टाचार मुक्त मुंबई’ और ‘पारदर्शिता’ लाना चाहते हैं तो महानगरपालिका में हुए सभी कामों और मोदानी को मुंबई बेचने के पूरे काम की श्वेतपत्रिका जारी करने की हिम्मत दिखाएं।

