नमस्कार पालघर। संवाददाता कालू सिंह देवड़ा
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आमेट। ढेलाणा – रविंद्र नाथ टैगोर की का जन्म जोड़ा सांको ठाकुरबाड़ी कोलकाता में हुआ। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ढेलाणा में टैगोर की जयन्ती बड़े हर्ष के साथ मनाई। रविंद्र नाथ टैगोर का साहित्यिक एवं शैक्षणिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा। टैगोर की कालजयी रचना गीतांजलि, राष्ट्रगान जन गण मन, रविंद्र संगीत, पर संपूर्ण संसार को गर्व है। टैगोर की रचनाएँ काबुलीवाला, घरे बाइरे, गोरा है । प्रार्थना प्रभारी मनोज कुमार शर्मा ने प्रार्थना सभा में टैगोर के जीवन पर विचार व्यक्त किये । मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि टैगोर की रचनाएं मानवीय मूल्यों की संवाहक है। हमें टैगोर के साहित्य को जरूर पढ़ना चाहिए । इस अवसर पर विद्यालय प्रथम सहायक विजय सिंह ने टैगोर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा की। गजराज सिंह व गिरिराज प्रजापत ने रविंद्र नाथ टैगोर से जुड़े प्रेरक प्रसंग सुनाए। टैगोर एक महान भारतीय कवि, दार्शनिक, संगीतकार और चित्रकार थे। जिन्हें गुरुदेव के नाम से जाना जाता है। 1913 में टैगोर नोबेल पुरस्कार( साहित्य) जीतने वाले प्रथम गैर यूरोपीय बने। भारत का राष्ट्रगान जन गण मन लिखा तथा विश्व भारती विश्वविद्यालय की स्थापना की। टैगोर की माता का नाम शारदा देवी तथा पिता पिता का नाम देवेंद्र नाथ टैगोर था । रविंद्र संगीत में 2000 से अधिक संगीत संग्रहित है। 1915 में टैगोर को नाइटहुड की उपाधि दी जिन्हें 1919 जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में लौटा दी ।टैगोर मृत्यु 7 अगस्त 1941 को कोलकाता में हुई।जयंती उत्सव कार्यक्रम में विद्यालय परिवार के जगदीश सिंह चुंडावत ,मुकेश कुमार गूगड, राजू पावण्डा, नारायण लाल रेगर, चुन्नीलाल रेगर उपस्थित रहे। यह जानकारी उत्सव- जयंती पर्व प्रभारी मनोज कुमार शर्मा ने दी।


