मुंबई में खाकी वर्दी हुई दागदार! पुलिस कांस्टेबल ने साथियों के साथ की 25 लाख की लूट, 4 आरोपी गिरफ्तार

मुंबई में एक बार फिर ऐसी वारदात सामने आई है, जिसने पुलिस वर्दी पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अंधेरी पूर्व इलाके में दिनदहाड़े 25 लाख की लूट के मामले में मुंबई पुलिस के एक सेवारत कांस्टेबल की संलिप्तता सामने आने से पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है. हालांकि अंधेरी पुलिस ने महज कुछ घंटों के भीतर इस हाई-प्रोफाइल केस का खुलासा करते हुए कांस्टेबल समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और पूरी लूटी गई रकम भी बरामद कर ली

 

गिरफ्तार आरोपियों में अंबोली पुलिस स्टेशन में तैनात कांस्टेबल ईश्वर बालकृष्ण जाधव (31), अभिषेक प्रमोद माली (33), सागर महादेव सुतार (36) और पुरुषोत्तम रामचल कनोजिया (39) शामिल हैं. अदालत ने चारों को 7 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है.

 

पलक झपकते ही रुपये से भरा बैग छीनकर फरार

 

यह वारदात 3 अप्रैल 2026 को दोपहर करीब 1:40 बजे अंधेरी पूर्व के व्यस्त तेली गली क्रॉस रोड पर हुई. नालासोपारा निवासी शैलेश मोरे (51) एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के सहायक हैं. वह रोजाना की तरह एक बड़ी नकदी लेकर जा रहे थे. उनके पास एक नीले रंग का बैग था, जिसमें 25 लाख रुपए रखे थे. जैसे ही मोरे फुटपाथ से गुजर रहे थे, एक आरोपी उनके पास आया, उन्हें धमकाया और पलक झपकते ही बैग छीनकर फरार हो गया।

 

सुनियोजित साजिश के तहत हुई लूट

 

इस वारदात को इतनी तेजी और सफाई से अंजाम दी गई कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ ही नहीं पाए. शुरुआती जांच में पता चला कि यह कोई सामान्य लूट नहीं थी, बल्कि बेहद सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी. आरोपियों को न सिर्फ पीड़ित की पहचान थी, बल्कि यह भी जानकारी थी कि वह किस समय और किस रास्ते से इतनी बड़ी रकम लेकर गुजरते हैं. जिस सटीकता से आरोपियों ने वारदात को अंजाम दिया, उससे यह आशंका मजबूत हो गई कि उन्हें अंदरूनी जानकारी मिली थी.

 

अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर आरोपियों की गिरफ्तारी

 

घटना के तुरंत बाद पुलिस हरकत में आ गई. तकनीकी सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय खुफिया तंत्र की मदद से पीएसआई बडे के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई. टीम ने तेजी से काम करते हुए आरोपियों की पहचान की और 4 अप्रैल की आधी रात के बाद अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर चारों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने उनके कब्जे से पूरी 25 लाख की रकम भी बरामद कर ली.

 

चारों आरोपियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं

 

इस मामले में सबसे बड़ा झटका पुलिस विभाग को लगा है, क्योंकि आरोपियों में एक सेवारत कांस्टेबल भी शामिल है. जाधव ने अपनी नौकरी का फायदा उठाकर इस वारदात को अंजाम दिया या वह किसी बाहरी सूचना नेटवर्क का हिस्सा था. पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह ने पहले भी इस तरह से नकदी ले जाने वाले लोगों को निशाना बनाया है. जांच में यह भी सामने आया है कि चारों आरोपियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है. इससे यह संभावना जताई जा रही है कि यह एक वन-टाइम, हाई-वैल्यू ऑपरेशन था, जिसे पूरी प्लानिंग के साथ अंजाम दिया गया.

 

लूट के मामले में आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज

 

चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 309(4) के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस अब इस केस की गहराई से जांच कर रही है, जिसमें आरोपियों के बीच की भूमिका, साजिश की रूपरेखा और संभावित अन्य सहयोगियों का पता लगाया जा रहा है. इस घटना ने आम लोगों के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब कानून की रक्षा करने वाला ही अपराध में शामिल हो जाए, तो सुरक्षा की जिम्मेदारी किस पर छोड़ी जाए? फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए हर एंगल से जांच में जुटी है. इसी तरह के एक अन्य मामले में पिछले महीने जुहू पुलिस ने भी दो पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया था।

 

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